Advocate Yashwant Bharti Kabir
Thursday, September 15, 2016
कबीर के राम
बेद बैदिक साहित्य सूत्रग्रंथ एवं छह शास्त्रो मे कही ईश्वर व परमात्मा के अर्थ मे राम शब्द का प्रयोग नही हुआ है ा ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी मे जब संक्षिप्त महाकाब्य पौलस्य बध अर्थात बालमीकी रामायण बालकाण्ड लीखा गया जिसका नाम बाद मे बालमीकी रामायण हुआ ा उसमे श्रीराम की कथा नर कथा के रूप मे चित्रित की गयी ा करीब ईसा के डेढ़ दो सौ पूर्व तक उसमे श्रीराम आदि चारो भाईयो को विष्णु का अंशावतार होना का प्रक्षेप हुआ ा ईसा के बारह सौ बर्ष बाद अन्य रामायणो मे श्रीराम को ईश्वर सिद्ध करने का प्रयास किया गया ा पहली बार आध्यात्म रामायण मे राम को परमब्रम्ह एवं जगत नियंता माना गया
कबीर साहेब तक राम नाम परमात्मा बाचक हो गया इसलिए कबीर साहेब ने राम नाम के शब्द को स्वीकार कर उसे अपना विवेकपूर्ण अर्थ दिया
कबीर साहेब ने कहां राम अपना स्वरूप ही है यह चेतन जीव ही तो राम है उनका राम अविनाशी चेतन है जो सबके ह्रदय मे निवास करता है वे अविनाशी जीव को ही राम मानते है उस पर विचार करने का राय देते है ा सदगुरू कबीर ने बीजक मे आत्मतत्व के लिए जीव शब्द का प्रयोग किया है कबीर साहेब ने दशरथ पुत्र राम को अपना भगवान या इश्वर कभी नही माना सदगुरू कबीर कबीर कहते है .हुदय बसे तंही राम न जाना ा मोको कहा ढुढत बंदे मै तो तेरे पास ा राम बढा की राम जानां ा दर की बात कहो दरवेशा वादशाह है कौने वेषा ा राम नाम जाने बीना भौ बुडी मुआ संसार ा
Tuesday, March 22, 2016
14 अप्रैल 2016 बाबा साहेब की जयंती
14 अप्रैल 2016 बाबा साहेब की जयंती
डा0 अम्बेडकर एक बयक्ति का नाम नही ब्लिक एक सम्पुर्ण क्रान्ति का नाम है ा डा0 अम्बेडकर एक विचारधारा है जो हर मानव को शिक्षित एवं प्रशिक्षित करता है तथा हर मानव को संगठित रहने की प्रेरणा देता है तथा सम्मान से जीने व अधिकारो के लिए संधर्ष करने हेतू निरन्तर जनान्दोलन चलाने का सबक सिखाता है ा बाबा साहेब ने कहा था ;;; मेरा समाज दर्शन तीन शब्दो मे निहित है ृृृृृृ समता स्वत्रंत्रता बन्धुता ;;; बाबा साहेब ने इस शोषित समाज को अपना दलितपन पिछडापन गरीबी असहाय बेरोजगारी को दूर करने के लिए तीन मूल मंत्र दिये
1; शिक्षित बनो 2; संगठित बनो 3; संधर्ष करो ा
इन तीन मूल मंत्रो का अनुसरण करने पर ही शोषित समाज का विकास हो सकता है अगर आगे बढना है प्रगति करनी है तो बाबा साहेब के बताये रास्ते पर चलना होगा ा बाबा साहेब का पहला मंत्र शिक्षा की बात करता है अर्थात शिक्षित बनो ा बाबा साहेब ने सामाजिक शिक्षा की बात की न कि शाेषित समाज बीए मए आदि पढा उस शिक्षा की बात कही ा बाबा साहेब ने शिक्षा के संबध मे कहा ;; हमे अपना दिमाग खुला रखकर सोचना होगा कि एक बर्ग जो बहुत ही कम समय मे है क्यो प्रतिदिन प्रगति कर रहा है और हम पिछडते जा रहे है आखिर क्यो इसका क्या कारण है ;;;;इसका मूल कारण अशिक्षा है ;;; जिसको शिक्षा की ज्योति जलाकर ही दूर किया जा सकता है ा अशिक्षा के कारण भारत कि आज 25 प्रतिशत आबादी उपेक्षित एवं अभिशप्त जीवन जीने को बाध्य है शोषितो के पिछडेपन का मूल कारण शैक्षणिक पिछडापन है जिसको शिक्षा कि ज्योति जलाकर दूर किया जा सकता है ा
डा0 अम्बेडकर एक बयक्ति का नाम नही ब्लिक एक सम्पुर्ण क्रान्ति का नाम है ा डा0 अम्बेडकर एक विचारधारा है जो हर मानव को शिक्षित एवं प्रशिक्षित करता है तथा हर मानव को संगठित रहने की प्रेरणा देता है तथा सम्मान से जीने व अधिकारो के लिए संधर्ष करने हेतू निरन्तर जनान्दोलन चलाने का सबक सिखाता है ा बाबा साहेब ने कहा था ;;; मेरा समाज दर्शन तीन शब्दो मे निहित है ृृृृृृ समता स्वत्रंत्रता बन्धुता ;;; बाबा साहेब ने इस शोषित समाज को अपना दलितपन पिछडापन गरीबी असहाय बेरोजगारी को दूर करने के लिए तीन मूल मंत्र दिये
1; शिक्षित बनो 2; संगठित बनो 3; संधर्ष करो ा
इन तीन मूल मंत्रो का अनुसरण करने पर ही शोषित समाज का विकास हो सकता है अगर आगे बढना है प्रगति करनी है तो बाबा साहेब के बताये रास्ते पर चलना होगा ा बाबा साहेब का पहला मंत्र शिक्षा की बात करता है अर्थात शिक्षित बनो ा बाबा साहेब ने सामाजिक शिक्षा की बात की न कि शाेषित समाज बीए मए आदि पढा उस शिक्षा की बात कही ा बाबा साहेब ने शिक्षा के संबध मे कहा ;; हमे अपना दिमाग खुला रखकर सोचना होगा कि एक बर्ग जो बहुत ही कम समय मे है क्यो प्रतिदिन प्रगति कर रहा है और हम पिछडते जा रहे है आखिर क्यो इसका क्या कारण है ;;;;इसका मूल कारण अशिक्षा है ;;; जिसको शिक्षा की ज्योति जलाकर ही दूर किया जा सकता है ा अशिक्षा के कारण भारत कि आज 25 प्रतिशत आबादी उपेक्षित एवं अभिशप्त जीवन जीने को बाध्य है शोषितो के पिछडेपन का मूल कारण शैक्षणिक पिछडापन है जिसको शिक्षा कि ज्योति जलाकर दूर किया जा सकता है ा
Wednesday, March 9, 2016
संत कबीर अम्बेडकर प्रज्ञा सेवा संस्थान गोरखपुर
संत कबीर अम्बेडकर प्रज्ञा सेवा संस्थान गोरखपुर
तथागत गौतम बुद्ध का जन्म उस समय हुआ जिस समय भारतीय समाज मे छुआ छूट पांखड पंडे पुजारियो उच नीच का भेद भाव तथा शाेषित समाज के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था तथा उनका जिवन पशुओ से भी ब्दतर था गैतम का जन्म लुम्बिनी वन मे हुआ वह दिन वैशाख पूर्णिमा का दिन था माता क नाम महारानी महामाया पिता महाराज शुधोधन थे तथा राजधानी कपिलवस्तु थी गौतम बुद्ध के पिता महाराज शुधोधन गण व्यवस्था के अनुसार मुखिया बने इसा के 6ठी शताब्दी मे जब गौतम का जनम हुआ उस समय उतर भारत मे काई समूचा प्रभुता संपन् राज्य नही था देश अनेक छोटे छोटे राज्यो मे बटा हुआ था जो राज्य किसी राजा के अधीन था उनको जपपद कहा जाता था उनकी संखया 16 थी जो किसी राजा के अधीन राज्य नही था वे कपिलवस्तु के शाक्य पावा कुशीनारा वेशाली कलिग कोलिया रामगाम आदि थे अर्थात यहा पर गण ब्यवस्था लागू थी न कि बर्ण व्यवस्था गोमत शाक्य बंशी थे गण ब्यव्स्था के अनुसार ही शुधोधन राजा बने ा तथागत गौतम ने भारतीय समाज मे फैली बुराइयो शोषित पिडित समाज को बहुत करीब से देखा ा निरंजना नदी के तट पर बुद्ध को जब ज्ञान प्राप्त हुआ तो सदियो से चली आ रही शोषित पिडित समाज को जगाने व आगे बढाने के लिए एक भिक्खु संध की स्थापना की ा गौतम एक तरफ भारतीय समाज मे फैली कोढ को समाप्त करने के लिए एक बहुत बडा आन्दोलन चलाया ा अल्पजन हिताय अल्पजन सुखाय के स्थान पर गौतम ने वहुजन हिताय बहुजन सुखाय का नारा दिया ा अपने भिक्खु संध शोषित समाज के लोगो को मान सम्मान दिया तथा मानव मानव एक समान अर्थात मानवतावाद को प्रतिध्थापित किया विषमतावादी व्यव्स्था के लोग जो मानव मानव को एक समान नही समझते थै उनकी व्यवस्था को धवस्त किया ा बुद्ध के आन्दोलन से एक क्रान्ति हुई जिसका परिणाम हुआ पूरा भारत अर्थात जहा जहा गौतम की वाणी पहुची वहा वहा बुद्ध के ही चर्चा हो रही थी इस प्रकार पूरा बौदमय समाज हुआ विषमतावादी व्यवस्था के पोषक की रीढ कि हडडी टूट गयी ा और भारतीय समाज मे एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ जिसका परिणाम शोषित समाज मे राजा महाराजा हुए ा दूसरी तरफ बुद्ध इस भारतीय समाज को एक आर्दश समाज बनाने के लिए त्रिशरण पंचशील अष्टागिक मार्ग चार आर्य सत्य परमिताए दिया जिसका पालन करते हुए लोग एक सभ्य इमानदार कर्मनिष्ट मानव बन सके ा एक मानव दूसरे मानव के साथ समता का व्यवहार करे सभी मानव सवत्रत हो ा
तथागत गौतम बुद्ध का जन्म उस समय हुआ जिस समय भारतीय समाज मे छुआ छूट पांखड पंडे पुजारियो उच नीच का भेद भाव तथा शाेषित समाज के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था तथा उनका जिवन पशुओ से भी ब्दतर था गैतम का जन्म लुम्बिनी वन मे हुआ वह दिन वैशाख पूर्णिमा का दिन था माता क नाम महारानी महामाया पिता महाराज शुधोधन थे तथा राजधानी कपिलवस्तु थी गौतम बुद्ध के पिता महाराज शुधोधन गण व्यवस्था के अनुसार मुखिया बने इसा के 6ठी शताब्दी मे जब गौतम का जनम हुआ उस समय उतर भारत मे काई समूचा प्रभुता संपन् राज्य नही था देश अनेक छोटे छोटे राज्यो मे बटा हुआ था जो राज्य किसी राजा के अधीन था उनको जपपद कहा जाता था उनकी संखया 16 थी जो किसी राजा के अधीन राज्य नही था वे कपिलवस्तु के शाक्य पावा कुशीनारा वेशाली कलिग कोलिया रामगाम आदि थे अर्थात यहा पर गण ब्यवस्था लागू थी न कि बर्ण व्यवस्था गोमत शाक्य बंशी थे गण ब्यव्स्था के अनुसार ही शुधोधन राजा बने ा तथागत गौतम ने भारतीय समाज मे फैली बुराइयो शोषित पिडित समाज को बहुत करीब से देखा ा निरंजना नदी के तट पर बुद्ध को जब ज्ञान प्राप्त हुआ तो सदियो से चली आ रही शोषित पिडित समाज को जगाने व आगे बढाने के लिए एक भिक्खु संध की स्थापना की ा गौतम एक तरफ भारतीय समाज मे फैली कोढ को समाप्त करने के लिए एक बहुत बडा आन्दोलन चलाया ा अल्पजन हिताय अल्पजन सुखाय के स्थान पर गौतम ने वहुजन हिताय बहुजन सुखाय का नारा दिया ा अपने भिक्खु संध शोषित समाज के लोगो को मान सम्मान दिया तथा मानव मानव एक समान अर्थात मानवतावाद को प्रतिध्थापित किया विषमतावादी व्यव्स्था के लोग जो मानव मानव को एक समान नही समझते थै उनकी व्यवस्था को धवस्त किया ा बुद्ध के आन्दोलन से एक क्रान्ति हुई जिसका परिणाम हुआ पूरा भारत अर्थात जहा जहा गौतम की वाणी पहुची वहा वहा बुद्ध के ही चर्चा हो रही थी इस प्रकार पूरा बौदमय समाज हुआ विषमतावादी व्यवस्था के पोषक की रीढ कि हडडी टूट गयी ा और भारतीय समाज मे एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ जिसका परिणाम शोषित समाज मे राजा महाराजा हुए ा दूसरी तरफ बुद्ध इस भारतीय समाज को एक आर्दश समाज बनाने के लिए त्रिशरण पंचशील अष्टागिक मार्ग चार आर्य सत्य परमिताए दिया जिसका पालन करते हुए लोग एक सभ्य इमानदार कर्मनिष्ट मानव बन सके ा एक मानव दूसरे मानव के साथ समता का व्यवहार करे सभी मानव सवत्रत हो ा
Tuesday, March 8, 2016
करूणा के सागर तथागत के विचार
करूणा के सागर तथागत के विचार
क्रोध और शत्रुता
करूण के सागर तथागत गौतम बुद्ध का जन्म् छठी शताब्दी मे उस समय हुआ जब भारतीय समाज मे मानव मानव मे उच नीच का भेद भाव पाखड बाहयआडम्बर पंडे पुजारियो का बोनबाला ा था तथा समाज बर्णव्यवस्था के अनुसार चलता था ाक्रोध और शत्रुता
गैतम ने कहा क्रोध मत करो शत्रुता को भूल जावो अपने शत्रुओ को मैत्री से जीतो
यही बौद्ध जीवन मार्ग है वैर से वैर कभी शात नही होता प्रेमसे ही वैर शांत होता है
जो यही सोचता है उसने मुझे गाली दी उसने मेरे साथ छल दुर्व्यहार किया उसने मुझे हरा दिया उसने लूट लिया उसका वैर कभी शांत नही होता जो ऐसे विचार नही रखता उसी का वैर शांत होता है ा
Sunday, March 6, 2016
Sant Kabir Ambedakar Pragya Seva Santhan Gorakhpur
सदगुरू संत शिरोमणि गुरू संत कबीर
सदगुरू संत शिरोमणि गुरू कबीर का जन्म उस समय हुआ जब भारतीय समाज मे छूआ .छूत उच् नीच जाति - ' पाति . गरीबी बेरोजगारी पाखंड अंध्विश्वास पंडे पुजारियो का बोलबाला था ं भारतीय समाज उस समय अंध्कार मे था शोषित बर्ग का सदियो से शाेष्ण हाे रहा था ा शोषितो की कोई आवाज सुनने वाला नही था उस समय संत कबीर ने भारतीय जनमानस मे फैली बुराइयो को जड से समाप्त करने का बीडा उठाया सद्गुरु कबीर एक उच्च कोटी के महान समाज सुधारक संत थे जिन्होने इस भारतीय समाज मे फैली कुरुतीयो को समाप्त करने का कार्य किया ा हजारो बर्षो से चली आ रही विष्मताबादी ब्यवस्था मे जो शोषित समाज के लोग पीस रहे थे उन्हे जगाने का कार्य किया ा सदगुरू कबीर ने कहा ृ
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।
अर्थ : बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुँच गए, पर सभी विद्वान न हो सके. कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा.
जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।
अर्थ : सज्जन की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना चाहिए. तलवार का मूल्य होता है न कि उसकी मयान का – उसे ढकने वाले खोल का.
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