संत कबीर अम्बेडकर प्रज्ञा सेवा संस्थान गोरखपुर
तथागत गौतम बुद्ध का जन्म उस समय हुआ जिस समय भारतीय समाज मे छुआ छूट पांखड पंडे पुजारियो उच नीच का भेद भाव तथा शाेषित समाज के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था तथा उनका जिवन पशुओ से भी ब्दतर था गैतम का जन्म लुम्बिनी वन मे हुआ वह दिन वैशाख पूर्णिमा का दिन था माता क नाम महारानी महामाया पिता महाराज शुधोधन थे तथा राजधानी कपिलवस्तु थी गौतम बुद्ध के पिता महाराज शुधोधन गण व्यवस्था के अनुसार मुखिया बने इसा के 6ठी शताब्दी मे जब गौतम का जनम हुआ उस समय उतर भारत मे काई समूचा प्रभुता संपन् राज्य नही था देश अनेक छोटे छोटे राज्यो मे बटा हुआ था जो राज्य किसी राजा के अधीन था उनको जपपद कहा जाता था उनकी संखया 16 थी जो किसी राजा के अधीन राज्य नही था वे कपिलवस्तु के शाक्य पावा कुशीनारा वेशाली कलिग कोलिया रामगाम आदि थे अर्थात यहा पर गण ब्यवस्था लागू थी न कि बर्ण व्यवस्था गोमत शाक्य बंशी थे गण ब्यव्स्था के अनुसार ही शुधोधन राजा बने ा तथागत गौतम ने भारतीय समाज मे फैली बुराइयो शोषित पिडित समाज को बहुत करीब से देखा ा निरंजना नदी के तट पर बुद्ध को जब ज्ञान प्राप्त हुआ तो सदियो से चली आ रही शोषित पिडित समाज को जगाने व आगे बढाने के लिए एक भिक्खु संध की स्थापना की ा गौतम एक तरफ भारतीय समाज मे फैली कोढ को समाप्त करने के लिए एक बहुत बडा आन्दोलन चलाया ा अल्पजन हिताय अल्पजन सुखाय के स्थान पर गौतम ने वहुजन हिताय बहुजन सुखाय का नारा दिया ा अपने भिक्खु संध शोषित समाज के लोगो को मान सम्मान दिया तथा मानव मानव एक समान अर्थात मानवतावाद को प्रतिध्थापित किया विषमतावादी व्यव्स्था के लोग जो मानव मानव को एक समान नही समझते थै उनकी व्यवस्था को धवस्त किया ा बुद्ध के आन्दोलन से एक क्रान्ति हुई जिसका परिणाम हुआ पूरा भारत अर्थात जहा जहा गौतम की वाणी पहुची वहा वहा बुद्ध के ही चर्चा हो रही थी इस प्रकार पूरा बौदमय समाज हुआ विषमतावादी व्यवस्था के पोषक की रीढ कि हडडी टूट गयी ा और भारतीय समाज मे एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ जिसका परिणाम शोषित समाज मे राजा महाराजा हुए ा दूसरी तरफ बुद्ध इस भारतीय समाज को एक आर्दश समाज बनाने के लिए त्रिशरण पंचशील अष्टागिक मार्ग चार आर्य सत्य परमिताए दिया जिसका पालन करते हुए लोग एक सभ्य इमानदार कर्मनिष्ट मानव बन सके ा एक मानव दूसरे मानव के साथ समता का व्यवहार करे सभी मानव सवत्रत हो ा
तथागत गौतम बुद्ध का जन्म उस समय हुआ जिस समय भारतीय समाज मे छुआ छूट पांखड पंडे पुजारियो उच नीच का भेद भाव तथा शाेषित समाज के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था तथा उनका जिवन पशुओ से भी ब्दतर था गैतम का जन्म लुम्बिनी वन मे हुआ वह दिन वैशाख पूर्णिमा का दिन था माता क नाम महारानी महामाया पिता महाराज शुधोधन थे तथा राजधानी कपिलवस्तु थी गौतम बुद्ध के पिता महाराज शुधोधन गण व्यवस्था के अनुसार मुखिया बने इसा के 6ठी शताब्दी मे जब गौतम का जनम हुआ उस समय उतर भारत मे काई समूचा प्रभुता संपन् राज्य नही था देश अनेक छोटे छोटे राज्यो मे बटा हुआ था जो राज्य किसी राजा के अधीन था उनको जपपद कहा जाता था उनकी संखया 16 थी जो किसी राजा के अधीन राज्य नही था वे कपिलवस्तु के शाक्य पावा कुशीनारा वेशाली कलिग कोलिया रामगाम आदि थे अर्थात यहा पर गण ब्यवस्था लागू थी न कि बर्ण व्यवस्था गोमत शाक्य बंशी थे गण ब्यव्स्था के अनुसार ही शुधोधन राजा बने ा तथागत गौतम ने भारतीय समाज मे फैली बुराइयो शोषित पिडित समाज को बहुत करीब से देखा ा निरंजना नदी के तट पर बुद्ध को जब ज्ञान प्राप्त हुआ तो सदियो से चली आ रही शोषित पिडित समाज को जगाने व आगे बढाने के लिए एक भिक्खु संध की स्थापना की ा गौतम एक तरफ भारतीय समाज मे फैली कोढ को समाप्त करने के लिए एक बहुत बडा आन्दोलन चलाया ा अल्पजन हिताय अल्पजन सुखाय के स्थान पर गौतम ने वहुजन हिताय बहुजन सुखाय का नारा दिया ा अपने भिक्खु संध शोषित समाज के लोगो को मान सम्मान दिया तथा मानव मानव एक समान अर्थात मानवतावाद को प्रतिध्थापित किया विषमतावादी व्यव्स्था के लोग जो मानव मानव को एक समान नही समझते थै उनकी व्यवस्था को धवस्त किया ा बुद्ध के आन्दोलन से एक क्रान्ति हुई जिसका परिणाम हुआ पूरा भारत अर्थात जहा जहा गौतम की वाणी पहुची वहा वहा बुद्ध के ही चर्चा हो रही थी इस प्रकार पूरा बौदमय समाज हुआ विषमतावादी व्यवस्था के पोषक की रीढ कि हडडी टूट गयी ा और भारतीय समाज मे एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ जिसका परिणाम शोषित समाज मे राजा महाराजा हुए ा दूसरी तरफ बुद्ध इस भारतीय समाज को एक आर्दश समाज बनाने के लिए त्रिशरण पंचशील अष्टागिक मार्ग चार आर्य सत्य परमिताए दिया जिसका पालन करते हुए लोग एक सभ्य इमानदार कर्मनिष्ट मानव बन सके ा एक मानव दूसरे मानव के साथ समता का व्यवहार करे सभी मानव सवत्रत हो ा

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