Tuesday, March 8, 2016

करूणा के सागर तथागत के विचार


करूणा के सागर तथागत के विचार
क्रोध और शत्रुता

करूण  के सागर तथागत गौतम बुद्ध का जन्‍म्‍ छठी शताब्‍दी मे उस समय हुआ जब भारतीय समाज मे मानव मानव मे उच नीच का भेद भाव  पाखड  बाहयआडम्‍बर पंडे पुजारियो का बोनबाला ा     था तथा समाज बर्णव्‍यवस्‍था के अनुसार चलता था ा
                                   गैतम ने कहा क्रोध मत करो शत्रुता को भूल जावो अपने शत्रुओ को मैत्री से जीतो
                         यही बौद्ध जीवन मार्ग है वैर से वैर कभी शात नही होता   प्रेमसे ही वैर शांत होता है
                 जो यही सोचता है उसने मुझे गाली दी उसने मेरे साथ छल दुर्व्‍यहार किया उसने मुझे हरा दिया उसने लूट लिया उसका वैर कभी शांत नही होता  जो ऐसे विचार नही रखता उसी का वैर शांत होता है ा


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